शुक्रवार, 8 जून 2012

किसी देश की तकदीर को संवारने वाली शक्तियाँ- एक मन्थन


21/5/2012

अगर पूछा जाय कि वे कौन-सी शक्तियाँ या संस्थायें हैं, जो किसी देश की तकदीर को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, तो जवाब होगा-
1. सत्ता प्रतिष्ठान। मगर जिस सत्ता-प्रतिष्ठान में शासकगण करोड़ों रुपये खर्च करके पहुँचते हों और पहुँचते ही करोड़ों के बदले खरबों वसूल करने में जुट जाते हों; साथ ही, जघन्य अपराधों में संलिप्त लोग भी जहाँ पहुँचते हों और पहुँचकर आन-बान-शान का जीवन बिताते हों, उस सत्ता-प्रतिष्ठान से हम कोई उम्मीद नहीं रख सकते।
2. न्यायपालिका। मगर जो न्यायपालिका बड़े अपराधों के अभियुक्तों को अति महत्वपूर्ण व्यक्ति का दर्जा देती हो; और उन्हें दोषी या निर्दोष साबित करने के बजाय उनकी जमानत एवं अन्यान्य गौण मुद्दों पर समय बर्बाद करते हुए दशकों तक मामलों को लटकाती हो, उस न्यायपालिका से हम कोई उम्मीद नहीं रख सकते।
3. सेना। मगर जिस सेना के उच्च अधिकारीगण (टॉप ब्रासेज) अपने वेतन-भत्तों-सुविधाओं का आकलन करते हुए कैसे कुछ ज्यादा हासिल किया जाय- इसी जुगाड़ में दिन गुजारते हों; और जो पदोन्नति पाने के लिए अनैतिक रास्ते भी अपनाते हों, उस सेना से हम कोई उम्मीद नहीं रख सकते।
4. जननेता। मगर जो जननेता राजनीति को काजल की कोठरी मानकर इसमें प्रवेश करने से डरते हों; और असफल हो जाने की आशंका के चलते सत्ता की बागडोर थामने से साफ इन्कार करते हों, उन जननेताओं से हम कोई उम्मीद नहीं रख सकते।
5.(क) आम जनता। मगर जो आम जनता इतनी भोली हो कि कोई भी तेज-तर्रार व्यक्ति (अच्छे या बुरे मकसद से) उसे भेड़ों की तरह हाँक सकता हो; और जो अपनी दुर्गति के लिए व्यवस्था के बजाय अपने पूर्वजन्मों के कर्मों को जिम्मेवार मानती हो, उस आम जनता से हम कोई उम्मीद नहीं रख सकते।
5.(ख) शिक्षित वर्ग। मगर जिस शिक्षित वर्ग का मानसिक स्तर इतना नीचा हो कि खुद को जात-पाँत तक की बेड़ियों से मुक्त न कर पाये; और जो किसी राजनीतिक/सांस्कृतिक/धार्मिक मान्यता का अन्धभक्ति की हद तक समर्थक हो, उससे हम कोई उम्मीद नहीं रख सकते।
5.(ग) नयी पीढ़ी। मगर जो नयी पीढ़ी चरित्रहीन सेलिब्रिटियों को अपन आदर्श मानती हो; और जो डॉक्टर, इंजीनियर, अफसर इत्यादि इसलिए बनना चाहती हो कि ज्यादा-से-ज्यादा दहेज एवं ऊपरी कमाई का जुगाड़ बन सके, उस नयी पीढ़ी से हम कोई उम्मीद नहीं रख सकते।
उपर्युक्त परिस्थितियाँ दुनिया के जिस किसी देश में पायी जाती है, उस देश के वासियों के प्रति मैं सहानुभूति व्यक्त करता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि नियति जल्द-से-जल्द वहाँ एक उद्धारकर्ता को भेजने की कृपा करे।
ईति। आमीन... एवमस्तु... 

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